छोटी शिरडी की स्थापना

भारत के उत्तर-प्रदेश प्रान्त में विश्वविख्यात एवं पौराणिक नगरी मेरठ के उपनगर कँकरखेड़ा में मेरठ करनाल मुख्य मार्ग पर कँकरखेड़ा पुलिस थाने के सामने इस परम सिद्धि क्षेत्र की स्थापना सन् 1979 के नवम्बर मास में श्री बाबा के आदेशानुसार व श्रीकृष्ण फलस्वरूप हुई। स्थापना काल में नई दिल्ली के लोदी रोड़ वाले मन्दिर के बाद यह छोटी शिरड़ी ही एकमात्र स्थान था जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उ0प्र0, मध्य प्रदेश, उड़ीसा व हिमाचल प्रदेश में। बाद में तो भारत के अनेक स्थानों में बाबा के मन्दिर बन गये। बाबा की कृपा एवं कृपाओं की माता “मैरी” के दिव्य आर्शीवाद से इस पुनीत कार्य हेतू जमीन भी तुरन्त प्राप्त हो गई व बैनामा भी विर्निघ्न हो गया तथा नाम बाबा ने रखा “श्री साँई बाबा सेवा संस्थान मेरठ” एवं प्रसिद्ध नाम “छोटी शिरड़ी” अतिशय क्षेत्र होने के कारण बाबा एक रात स्वप्न में आये व सँत जी के हाथ मिश्री व उदी से भरकर बोले “पहले मिश्री खाओ-फिर उदी खा लो।” जहाँबाबा सपने में बैठे थे। वहीं पर पानी वास्ते submersible pump लग गया। जहाँ पर भक्तों को अविरल पीने के सोते में 68 तीर्थों का जल आकर भक्तों को तुश्टि, पुश्टि एवं सन्तुष्टि प्रदान करता है। छोटी शिरड़ी ही पूरे विश्व में एक ऐसा अलौकिक बाबा का कृपा स्थल है जहाँ मनोकामना पूर्ण हेतू नारियल बाँधे जाते है एवं मनोकामना पूर्ण होने पर स्वयं टूट जाते है। स्थापना का शुभ कार्य जैसे शुरू हुआ उसी प्रकार से सुचारू रूप से भवन निर्माण का कार्य चल पड़ा और कभी-भी कोई कमी नहीं आयी एवं बाबा की कृपा से कभी-भी छोटी शिरड़ी के मुख्य द्वार के बाहर जाकर धन एकत्र करने का बाबा ने कष्ट नहीं करने दिया। श्री साँई बाबा का श्री विग्रह मन्द-मन्द मुस्कान लिए ऐसा लगता है मानों बाबा अभी बोल पड़ेगे। बाबा का दाहिना हाथ आर्शिवाद मुद्रा में है। श्री विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा बसन्त पंचमी के दिन सन् 1984 में सम्पन्न हुई। तथा सबसे अद्भूत घटता तब हुई जब बाबा मूर्ति में प्रवेश कर अपनी दिव्य ज्योति के रूप में गर्भ-गृह के दीप की शिखा से उठकर प्रतिमा में पं0 शुक्ल जी के देखते-देखते समा गये। “मन चंगा तो कठोती में गंगा” वाली बात हो गई। जिनकी जरूरत थी वे आ गये, हमेशा के लिए भक्तों को सुखी करने हेतु। “श्री साँई बाबा की जय” जो भक्त इस अध्याय को नित्य प्रातःस्नान कर पढ़ेगा उसके समस्त पाप कट जायेंगे। व इहलोक एवं परलोक में सुखी रहेगा।


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